एक युवती की इच्छा, पुलिस की सतर्कता और अदालत की संवेदनशीलता इन तीनों के बीच चले इस दिलचस्प मामले का अंत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ के अहम फैसले के साथ हुआ। कोर्ट ने साफ कहा, जब युवती बालिग है और अपनी मर्जी बता चुकी है, तो उसे वहीं रहने दिया जाए जहां वह रहना चाहती है।
पिता ने लगाई थी याचिका
मामला एक पिता की याचिका से जुड़ा था, जिनकी बेटी किसी युवक के साथ चली गई थी। याचिका दायर होने के बाद पुलिस उसे बंगाल से बरामद कर पुलिस ग्वालियर लेकर आई थी। कोर्ट में पेश होने पर युवती ने कहा कि मैं अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती हूं। राज्य की ओर से आशंका जताई गई कि हो सकता है कि संबंधित युवक फिर से उसे ले जाने के लिए आए।
वन स्टॉप सेंटर में रही युवती
एहतियात के तौर पर युवती को वन स्टॉप सेंटर कंपू में रखा गया। कुछ दिन बीत जाने पर भी जब युवक न तो ग्वालियर आया और न ही संपर्क किया तो आशंका खत्म होते ही कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए युवती को उसके माता-पिता के साथ जाने की अनुमति दे दी।
हाई कोर्ट की युगल पीठ ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति की इच्छा सर्वोपरि है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर युवती को परिवार के सुपुर्द करने के निर्देश दिए गए।
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